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'वर्कलोड' के नए फरमान से कंपकपाए लविवि के मास्टर

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लखनऊ। लविवि के नए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने 'किचन कैबिनेट' में पद पाने के लिए उतावले मास्टरों को बड़ा झटका दिया है। मीटिंग में उन्होंने शिक्षकों से मौजूदा सेमेस्टर में पढ़ाए जा रहे उनके काम/क्लास की जानकारी मांगी है। दरअसल शासन के नियम है कि असिस्टेंट प्रोफेसर जहां 16 क्लास प्रति सप्ताह लेगा तो वहीं एसोसिएट और प्रोफेसर को 14 क्लास, एचओडी को 12 क्लास प्रति सप्ताह लेनी होती है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा कुलपति को अपना चेहरा दिखाकर प्रशासनिक पद पाने की होड़ में लगे शिक्षकों के लिए यह बड़ी मुसीबत हो गई है। खासतौर से उन मास्टरों के लिए जो संगठन से जुड़े हुए हैं और पद पाने के लिए लालायित हैं। एबीवीपी की महानगर अध्यक्ष पद से हटाई गई भुवनेश्वरी भारद्वाज जिस विभाग से आती है, उस विभाग में बच्चे ही नहीं है, ऐसे में क्लास लेना तो दूर की बात है। उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहें हैं, ऐसे में अब उन्हें संस्कृत विभाग में जाकर अपना 'वर्कलोड' दिखाने को कहा गया है, तो कुछ इसी तरह से अयाज अहमद इस्लाही को भी अपने काम के माध्यम से खुद को साबित करने की चुनौती मिल गई है। सबसे मजेदार तो राजेश्वर यादव का हाल रहा है। हॉस्टल के प्रोवोस्ट होने के कारण वे संविदा कर्मचारियों को अपनी कोठी पर काम करने के लिए लगाए रहते थे, इसी दौरान एक कर्मचारी चौथी मंजिल से गिरने से पिछले चार महीने से अस्पताल में भर्ती है। उक्त संविदा कर्मचारियों की गले की हड्डी टूट गई है, कर्मचारी के गने तक बिक गए लेकिन मास्टर साहब पर कोई आंच नहीं आई। नए कुलपति के आगे पीछे घूम कर अपना चेहरा दिखाने में लगे राजेश्वर यादव के लिए भी अभी मुसीबत हो गई है कि वह अपनी 16 क्लासेस कहां से दिखाएं, जबकि पूर्व कुलपति आलोक राय की बेहद विश्वसनीय रही केया पांडे पर तो आरोप रहा है कि वह कभी क्लास लेने जाती ही नहीं है, ऐसे में वह मौजूदा सेमेस्टर में कैसे अपनी 16 क्लासेस को साबित करेंगी, यह एक बड़ी चुनौती उनके सामने खड़ी हो गई है। माना जा रहा है कि कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी के नए फरमान से दो दर्जन के करीब प्रोफेसर प्रशासनिक भवन के बजाय एक बार फिर से अपने विभाग में दिखाई पड़ने लगे हैं। माना जा रहा है कि अगले हफ़्ते किचन कैबिनेट के कुछ पद पर लोगों की तैनाती हो सकती है। ऐसे में उनके आसपास चक्कर लगाने वालों और फूल का गुलदस्ता देकर संबंध बताने वाले भाग खड़े हुए हैं।

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